कोटा आखिर छात्रों के लिए क्यों बन रहा death point?, जानें ये खास बातें

Death Point : इंजीनियरिंग और डॉक्टरी की तैयारी करने के लिए स्टूडेंट दूर-दराज से मिडिस क्लास फैमिली का सपना आंखों में सजाए किसी के आंखों का तारा और प्राणों का प्यारा कोटा के लिए निकलता है. परिवार को उम्मीद होती है कि जब उनका बच्चा वापस लौटेगा तो घर की सूरत बदल देगा, वह अफसर बन जाएगा, कामयाबी और बुलंदी छुएगा, मगर अफसोस! इन दिनों राजस्थान के कोटा से जो खबरें निकल कर आने लगी हैं वो खुशियों की नहीं हैं, वह गम की हैं. कोटा से जो खबरें आ रही हैं, वह छात्रों के आत्महत्या करने की हैं और ये सिलसिला लगातार चल रहा है.

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Kota में हर साल आने वाले छात्रों का आंकड़ा

साल 2021-22 में 1,15,000 कोचिंग के लिए पहुंचे थे

साल 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 1,77,439 हो गई थी.

साल 2023-24 में ये आंकड़ा 2,05000 तक पहुंच गया है.

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Death Point : कोटा पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 17 छात्रों ने आत्महत्या की थी. साल 2016 में 16, साल 2017 में 7, 2018 में 20 और 2019 में आठ छात्रों ने आत्महत्या की थी. और इसी साल अगस्त तक 25 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं.

हालांकि कोचिंग स्टूडेंटस की रोकथाम के लिए पुलिस और प्रशासनिक विभाग द्वारा कई प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन तमाम प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं.

जिला कलेक्टर ओपी बुनकर ने नए आदेश जारी किए हैं, जिसके तहत आगामी दो माह तक किसी प्रकार के कोई भी टेस्ट नहीं लिए जाएंगे. पंखों में एंटी सुसाइड डिवाइस लगाए जाएं इससे छात्रों के सुसाइड के मामले थमेंगे, ऐसा प्रशासन का मानना है.

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