कौन हैं Vinod Verma, पत्रकार या सरकार के प्रवक्ता, जवाब ढूढ़ते रह जाओगो…

Vinod Verma Cm Bhupesh Baghel के करीबी बताये जाते हैं। और कथित अश्लील सीडीकांड से चर्चा में आये। वर्तमान में सीएम भूपेश बघेल के सलाहाकार हैं। साल 2017 में सेक्स सीडी कांड में उन्हें गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके से गिरफ्तार किया गया।

विनोद वर्मा देशबंधु, अमर उजाला, बीबीसी सहित कई मीडिया संस्थानों के महत्वपूर्ण पदों पर रहे। विनोद वर्मा लगभग दो दशक तक मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता का लंबा अनुभव है।

हाल में Vinod Verma कई मामलों के चलते चर्चा में हैं। विपक्षी पार्टी भाजपा विनोद वर्मा का नाम लगातार महादेव एप से जोड़ती रही है। जिसके बाद ईडी ने विनोद वर्मा के निवास में रेड मार कर एक कदम बढ़ा दिया। और प्रदेश की राजनीति में अचानक भूचाल सा आ गया है। जो अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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महादेव बुक एप के मालिक शुभम सोनी के हाल में आये वीडियो ने ठंडी पड़ रही प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया। जिसमें अपने आप को शुभम सोनी बताने वाला शख्स वर्मा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, बिट्टू और प्रशांत अग्रवाल नाम का बार-बार जिक्र आ रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा ने जिस तरह मामले को राजनीतिक रंग दिया। वह किसी से छिपी नहीं है। बीजेपी ने वीडियो में उपयोग हो रहे वर्मा को विनोद वर्मा बताया है। और महादेव एप मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विनोद वर्मा, बिट्ट व प्रशांत अग्रवाल की भूमिका पर सवाल उठाया है।

Vinod Verma ने अब एक कदम आगे बढ़कर bjp नेता सिद्वार्थ नाथ सिंह, केदारनाथ गुप्ता व अनुराग अग्रवाल को लिगल नोटिस थमाया है। जिसमें उनका कहना है। छत्तीसगढ़ में लाखों वर्मा होंगे। इनमें से हजारों लोगों को वर्मा जी के नाम से पुकारा जाता होगा। तो भाजपा के राष्ट्रीय व प्रदेश प्रवक्ता किस आधार पर इस नतीजे पर पहुंचे कि वर्मा जी और कोई नहीं विनोद वर्मा था? उन्होंने आगे कहा मैं न किसी शुभम सोनी को जानता हूं और न कभी उससे मिला हूं। मेरा नाम प्रवक्ता गणों की ओर से जानबूझकर व अवैधानिक ढंग से लिया गया है। यह मुझे बदनाम करने की सोची समझी राजनीतिक चाल है।

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विनोद वर्मा ने ईडी के कामों पर सवाल उठाते हुये कहा है। एक अनजान व्यक्ति के बयान पर ईडी ने प्रेसनोट जारी कर दिया। वह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पैसे पहुंचाता था। अभी इस बात की जांच बाकी है कि इस बयान का सच क्या है। लेकिन ईडी ने भाजपा को चुनावी हथियार दे दिया है। और ईडी ने इस बारे में अभी कोई प्रेसनोट जारी नहीं किया है कि रवि उप्पल के भाई राहुल उप्पल की फोटो भाजपा के जिन नेताओं के साथ दिखी है उनके बारे में वह क्या करने जा रही है।

वह यह भी नहीं बता रही है कि महादेव ऐप के मालिकों में से एक सौरभ चंद्राकर की फोटो जिस भाजपा नेता के साथ मिली है उसके बारे में वह क्या कर रही है। अभी यह भी जानना बचा है कि जिस कार में पैसा मिला, उसके मालिक के संबंध में वह क्या कार्रवाई करने जा रही है जो कथित तौर पर एक भाजपा नेता का भाई है।

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जिस व्यक्ति से करोड़ों की रकम बरामद हुई उसकी फोटो भी भाजपा के एक बड़े नेता के साथ है, तो उनसे भी क्या पूछताछ होगी? इन सवालों के जवाब अभी नहीं मिलेंगे क्योंकि चुनाव का समय है और भाजपा के ऐम्बेडेड डिटेक्टिव्स यानी ईडी अभी अपने आकाओं के खिलाफ कार्रवाई तो दूर सोच तक नहीं सकती।

सबसे पहले बता दें कि इस लेख में मानहानि के बिंदु और सवाल कांग्रेस के विज्ञप्ति से लिये गये हैं। जो स्वयं विनोद वर्मा के प्रेसवार्ता के अंश हैं। जिसमें वे अपने आपका बचाव करते नजर आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता की भूमिका में कांग्रेस की ओर से सफाई देते नजर आ रहे हैं। फिर क्यों विनोद वर्मा को अपने आपको कांग्रेस प्रवक्ता कहलाने में हर्ज हो रही है। ये समझ से परे है।

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