Save Hasdeo : गमलों में पौधा लगाने वाले, गार्डन को जंगल समझने वाले, क्या जंगल की अहमियत नहीं समझोगे…

महेन्द्र कुमार साहू/ Save Hasdeo : सूर्योदय के साथ एक और नये वर्ष 2024 की शुरुआत हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर सभी तरफ नये वर्ष के शुभकामना संदेश दिये जा रहे हैं। मैं भी चाहता हूं सबके लिए कुछ अच्छा लिखूं…लेकिन कैसे लिखूं…मेरे कलम की स्याही हसदेव के दर्द को भूल नहीं पा रहे…। शायद आपको लग रहा होगा। साल की शुरुआत ये कौन से दर्द के साथ करने जा रहा हूं। हसदेव के जंगल देश के जलवायु परिवर्तन में बड़ा योगदान निभाते हैं। उसे इस तरह कटने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है।

अब तक लगभग 50 हजार से अधिक पेड़ कट चुके हैं। वहीं लाखों पेड़ों को अडानी के लिए भेंट चढ़ाया जाना है। ऐसे में हसदेव बचाओ आंदोलन से जुडे लोगों को ही नहीं देशभर से जनमानस को उठ खड़े होने की जरुरत है। आज नहीं जागे तो त्रासदी के द्वार पर पहुंचना कोई नई बात नहीं होगी।

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Save Hasdeo : गमलों में पौधा लगाने वाले, गार्डन को जंगल समझने वाले, क्या जंगल की अहमियत को नहीं समझोगे। मुर्गा बकरा न काटने की सलाह देने वाले जंगल कट जाने पर क्या कुछ नहीं बोलोगे। रात में तुलसी का पत्ता तोड़ने पर पाप मानने वाले क्या अब भी कुछ नहीं बोलोगे। ये जंगल नहीं हमारे प्राणु वायु हैं। अब न जागे तो कब जागोगे।

हसदेव एक जंगल नहीं, बल्कि मानव समाज की धरोहर है। आने वाली पीढ़ी को तुम क्या मुंह दिखाओगे। क्या अब भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहोगे। हसदेव के गर्भ में दबे लाखो टन कोयले के लालची अडानी छत्तीसगढ़ महतारी को विकास का लालच दिखाकर छलनी-छलनी करने में लगा है।

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नये वर्ष की सूर्योदय हो चुकी है। आप भी अपने अंदर नये वर्ष के सूर्योदय को जगोओ। और उठो जागो…

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