Assembly Election : प्रदेश में टलने जा रहा विधानसभा चुनाव! जानें क्या है इसकी सच्चाई…

Assembly Election : इन दिनों देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है। जिस पर केन्द्र सरकार जल्द बिल लाने जा रही है। केन्द्र की भाजपा सरकार संसद की 18-22 सितंबर तक विशेष सत्र बुलाने जा रही है। इस सत्र में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का बिल लाया जा रहा है।

वन नेशन-वन इलेक्शन‘ को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काफी इंट्रेस्टेट नजर आ रहे हैं। वे कई बार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। अब सवाल उठता है आखिर ये सब कैसे संभव हो पाएगा। तो इसका जवाब है। संविधान के अनुच्छेद- 83, 85, 172, 174 और 356 में संशोधन करके यह मुÞमकिन है।

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वर्तमान में देश में कई राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ-साथ होते हैं। तो कई राज्यों के पहले या बाद में होते हैं। ऐसे में कुछ राज्यों के विधानसभा को समय से पहले भंग करना होगा। तो कुछ का कार्यकाल बढ़ाना होगा। और ये सब संभव होगा। संविधान के अनुच्छेद- 83, 85, 172, 174 और 356 में बदलाव करके।

ये पांच अनुच्छेद क्या कहते हैं?

– अनुच्छेद-83: इसके मुताबिक, लोकसभा का कार्यकाल पांच साल तक रहेगा. अनुच्छेद- 83(2) में प्रावधान है कि इस कार्यकाल को एक बार में सिर्फ एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है.

– अनुच्छेद-85: राष्ट्रपति को समय से पहले लोकसभा भंग करने का अधिकार दिया गया है.

– अनुच्छेद-172: इस अनुच्छेद में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का तय किया गया है. हालांकि, अनुच्छेद-83(2) के तहत, विधानसभा का कार्यकाल भी एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है.

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– अनुच्छेद-174: जिस तरह से राष्ट्रपति के पास लोकसभा भंग करने का अधिकार है, उसी तरह से अनुच्छेद-174 में राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार दिया गया है.

– अनुच्छेद-356: ये किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान करता है. राज्यपाल की सिफारिश पर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है.

फिर साथ हो सकेंगे चुनाव?

– विकल्प 1: कुछ राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही होते हैं. कुछ राज्यों में लोकसभा से कुछ महीने पहले होते हैं. तो वहीं, कुछ राज्यों में लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद ही चुनाव होते हैं. ऐसे में कुछ राज्यों में विधानसभा समय से पहले भंग करके और कुछ का कार्यकाल बढ़ाकर लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव कराए जा सकते हैं.

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कैसे हो सकता है?: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने हैं. इसी तरह आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा और सिक्किम में चुनाव लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद होंगे. ऐसे में जिन राज्यों में पहले चुनाव होने हैं, उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए और जहां बाद में चुनाव होने हैं, वहां समय से पहले विधानसभा भंग की जाए तो फिर अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव के साथ ही यहां विधानसभा चुनाव हो सकते हैं.

– विकल्प 2: कई राज्यों में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के दो साल बाद खत्म होती है. ऐसे में दो फेज में चुनाव कराए जा सकते हैं. पहले फेज में लोकसभा के साथ ही कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव हो जाएं. और दूसरे फेज में बाकी बचे राज्यों के चुनाव हो जाएं. ऐसा होता है तो पांच साल में दो बार ही विधानसभा चुनाव होंगे.

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