Adani की लालच : मंडराता मानव जीवन पर संकट और कराहती आदिवासी संस्कृति…

महेन्द्र कुमार साहू। Adani : हसदेव के जंगल आज चीख-चीखकर मदद की गुहार लगा रही है। दो-चार हाथ तो आगे आये इसे बचाने। हसदेव के जंगलों की चीख पुकार शासन-प्रशासन और मीडिया के कानों तक भले नहीं पहुंच पा रही हो। लेकिन अब भी आस बंधी हुई है कोई तो मदद के लिए आगे आएगा। ऐसे कैसे कोई हसदेव के जंगलों को कटने के लिए छोड़ देगा।

आज मीडिया और शासन-प्रशासन भले ही अपनी आंखे मुंद ली हो। लेकिन सोशल मीडिया में चारों तरफ हसदेव के कट रहे जंगलों की चर्चा है। जिसमें आलोक शुक्ला, किसान नेता राकेट टिकैत व आदिवासियों की आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया में आदिवासियों की तकलीफ महसूस किये जा सकते हैं।

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#Hasdev के कट रहे जंगल अडानी की लालच की भूख खुद-ब-खुद बयां कर रहे हैं। अडानी की लालच पूरे मानव समुदाय के लिए आज खतरा बन गया है। कोरोना संकट को अभी पूरी दुनिया भूली भी नहीं है। और फिर ऐसी त्रासदी को निमंत्रण दिया जा रहा है।

दिनों दिन बढ़ता तापमान हमें आने वाले संकट के इशारे कर रहे हैं। फिर भी लालच की भूख बढ़ती जा रही है। देश के कई राज्य 50 डिग्री तक तापमान झेल चुके हैं। तो क्या अब हम 70 डिग्री के लिए अपने आप को तैयार कर पाएंगे। अभी नहीं सुधरे तो 70 डिग्री भी कम ही पड़ जाएगी। इसलिए अब तो जागना ही होगा।

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Adani के पैसों की भूख ने आज देश को संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। अडानी को आने वाले संकटों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि उसके घर तो एसी के हैं। हमारे घरों के बोर सुख रहे हैं। उसके घर में बोतल बंद पानी विदेशों से पहुंच रहे हैं। लेकिन नदियां सुखी और हम प्यासे रह जाएंगे। कौन समझाये इस पैसों के भूखे अडानी को…। जो मानव जीवन पर संकट बन कर मंडरा रहा है।

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